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राखी

राखी मुबारक हो सबको राखी आई ढ़ेर सारा प्यार भी लाई मिलते है सब बहन और भाई सजती है भाई की कलाई खा कर मिठाई  दुआ करते  सभी बहन और भाई चाहे पास रहे या दूर रहे रिश्तों के धागे मजबूत रहे खुशियों से भरे सब आंगन  रहे सफलता की सीढ़ियां सब चढ़ते रहे

gussa(गुस्सा)

गुस्सा    गुस्सा भी   अजीब  ही जज़बात  है पी  लेते  है  तो खुद जलते  है ज़ाहिर  हो  तो  रिश्ते  जल  जाते  हैं गुस्सा  आता  है  विचारो  के टकराव  से    बुढ़ापे-बिमारी   की लाचारी  के प्रभाव से निकलता  है  भावनाओ  के  बहाव में  बन  जाता  है  दर्द ,प्यार  के आभाव में  वो  हम  पर  गुस्सा  करके अपनापन   जताते  हैं हमने  किया  तो , गलत सोच  बताते  हैं ऐसा  लगता   है  जैसे  गुस्सा  करना अपना   हक़  और  गुस्सा  सहना  हमारा   कर्तव्य   बताते  हैं गुस्सा  नहीं  है  भली  शै  ए  दोस्त ये  सबसे  जुदा  तुमको  कर देता है तन  में  रोगों  को  जन्म  ये  देता मन  को  अशांत  ये  कर  देता  है इसलिए  जितना हो सके  प्यार  अपना  लो गुस्सा  को अपना  आखरी  हथियार  बना लो

chai (चाय )

चाय चाय   चाय  चाय  ! बहुत  पसंद  है  मेरे  बाबा  को  चाय सुबह  उठते  ही देदो  चाय रात  को  सोना  है  ,देदो  चाय बदन में दर्द हो ,देदो  चाय सर  में  दर्द  हो, देदो  चाय खाना  ज्यादा  हो गया , देदो  चाय  खाना  नहीं  पचा ,देदो  चाय शाम  हो गई  ,देदो  चाय हर  दो  घंटे  में , देदो  चाय नींद  नहीं  आ रही   ,देदो  चाय नींद  नहीं   खुल रही ,देदो चाय लस्सी  दूध  इन्हे नहीं  भाय इनको  चाहिए  बस  चाय  ही चाय