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Showing posts from June, 2018

tanhai

तनहाई तनहाई  में ही  तुम ,खुद  को जानते  हो वर्ना  लोगों  की   राय  को सच मानते  हो खुद को जानने  के लिए  तनहाई  जरुरी  है जैसे  प्यार  में लड़ाई  जरुरी  है लोग डरते  है ,तनहा   रहने  से जैसे  डरते  हो ,खुद ही खुद को मिलने  से ये दुनिया  कब किसी  की  हो पाई  है असली  साथी  तो  तनहाई  है जिन्होने  ने  तनहाई  में  खुद  को पहचाना   है उन्हें  ही  बाद  में इस  जग ने माना  है उस  अल्ला  और  रब  को  कहाँ  जानते  हो मंदिर  मस्जिद में  जिसे  छानते  हो मंदिर  मस्जिद  तो  सिर्फ उसे  याद  करने  के दर  है असल  में  तो  तेरा  दिल  ही  उसका  घर  है झांकोगे  तुम  जब  अपने  दिल में पाओगे  मक्का  मदीना  इसी दिल में  दिल  में झाँकने  के लिए   एकांत  जरुरी  है सबसे  पहले  मन  शांत  जरुरी  है मन  की  शांति  नहीं  मिलती जग  की  भीड़  में भगवान  मिलता   है ,शांत मन से तनहाई की तसवीर में

manzil

मंज़िल बहुत भटकी  मै इसकी  तलाश  में खाई बहुत  चोट्टे  इसकी  आस  में हर बार लगा  ,बस  पहुँच  गई लेकिन फिर  हाथ  से फिसल  गई कई  बार  दरवाज़े  पे  दस्तक दी मगर फिर  ना  जाने  कहाँ  खो  गई मै  तो  बस  ताकते  ही रह  गई लोग कहते  थे हुनर  होता है  सब में कोई बेहुनर  नहीं इस पूरे  जग में मुझे  खुद में  कुछ  भी दिखता  नहीं  था बहुत ढूंढ़ने पे भी  मिलता  नहीं  था बहुत  उदास सी  मैं  रहने  लगी थी मै  ये सबसे  कहने  लगी मंज़िल नहीं  लगता  कोई  नसीब  में जाने  क्या लिखा  इस  तक़दीर  में हिम्मत ने मेरी  फिर  संभाला  मुझे फिर  नए  राह  पे  डाला  मुझे थमाया  मुझे  कागज़  कलम लिख  डाले उसमें  सारे  ही गम एक एक  कर  पनने  भरने  लगे मेरे  दिल  के अरमा  फिर  जगने  लगे  लोग  भी  धीरे  धीरे  पढ़ने  लगे जीत  के  ढोल  जैसे  बजने  लगे लगा   रहम  आया  मुझ  पर  मेरे  खुदा  को जैसे   कहा  उसने  दिखा  दो  इस  जहाँ  को तू  अकेली  नहीं ,मैं  हूँ  साथ  तेरे करूँगा  ख़वाब  सभी    तेरे   पूरे

hum kisi se kam nahi

हम  किसी  से कम नहीं हम सबको  बनाया  मालिक  ने कुछ  खूबियों से  कुछ कमियों  से पूरा  तो  दुनिया  में  कोई  नहीं सिवाय  उस  बनाने  वाले  के फिर  क्यों  एक  इंसान, इंसान से डरे क्यों  कोई किसी से बैर  करे हर  एक  में  कोई  तो  खूबी  है वो  ढूंढे  वही  हर इंसान में लेकिन ये भी तो सच है कि एक  जैसा नहीं  कोई  इस  जहां  में दो  संताने  इकलौती  माँ  की  भी एक  जैसी  कभी  नहीं  होती कोई  गरम  कोई सर्द  है  स्वभाव  से कोई  जी  रहा  किसी आभाव   से हालात  अलग  है,खयालात  अलग हैं तजरबे  अलग है , जज़बात  अलग  हैं हर  एक  इंसान की  कद्र  करो क्योंकि  हर  एक के  किसमत  और  किरदार  अलग  हैं

sann 1990 vala pyar

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 सन  1990  वाला  प्यार मै  जी  रही  हूँ  2018  में पर  1990  वाला  प्यार  चाहिए मुझे  जरुरत  नहीं है तोहफों  की बस  समझने  वाला    एक  दिलदार  चाहिए मै  खाब  नहीं  रखती  महलों  के पर  रहने  को  घरबार   चाहिए मुझे  भूख नहीं है  तन  की बस  दोस्त    एक  वफादार  चाहिए जो मेरी   भावनाओ  का  सम्मान  करे गुणों  का  कोई  धनवान  चाहिए मैं  पूजा  करू  जिस देवता  की क़ोई  ऐसा  महान  इंसान  चाहिए मेरी  भूलों  को हँस  के  सुधारा  करे समझे  आँखे  क्या  इशारा  करे ख़ामोशी  भी  मेरी  पढ़लेगा  वो गम  को  खुशी  में  बदलदेगा   वो बस  ऐसा  ही एक  दिलदार  चाहिए मुझे 1990  वाला  प्यार  चाहिए

Mera parichey

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मेरा  परिचय  मेरा  नाम  है  प्रीती  प्यार  करना और  पाना   है मेरी  नीति  अगर  कविताए  छू  जाए  आपके  दिल  को  तो  समझू   मैं  जीती  मेरी  कविताओं  को मत  समझना  मेरी  तन बीती  इस  दुनिया  के रंग मंच पर  कई  कलाकार  मिलते  है  कुछ  एक बार  तो  कुछ बार  बार  मिलते हैं  जो  कभी  तो  हसाते  हैं  और कभी  रुलाते  हैं  लेकिन   हर  बार  कुछ  सिखाते   है  बड़े  बज़ुर्ग  भी  कई बार  किस्सै  कहानियाँ  सुनाते  हैं  इन  सब बातों  से  मेरे  तज़ुर्बे  मेरी  समझ  बनती  है  उस  समझ  की  स्याही  से  मेरे  दिल  के तहखानों  में  जो भावनाओ  का  समुन्दर  उठता  है  उसमें  से  मेरी  कविताएँ  निकलती   हैं 

khuda hafiz

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खुदा  हाफिज  जा  रहा  है  तो  जा ए  दोस्त                                मैं  तुझे   रोकूँगा   नहीं   मगर  याद  रख                 कोई  तेरे  लौटने  की  राह  तक  रहा  होगा हर  हाल  में   तेरी  मेहफूसियत  की                                            दुआ  कर   रहा  होगा अच्छा  होता  जो तू  बता  देता                                     अपने  जाने  की  वजह ये  मज़बूरी  ही  है  ,                      कहीं  कोई  गिला  तो  नहीं पर  अफ़सोस  है   इस  बात का                                  तूने  मुझे  इस  काबिल  समझा ही नहीं यूँ  तो  हमने   एक  लम्बा  अरसा  साथ   बिताया  था                                        फिर  भी  मुझे  तू     कहाँ   जान  पाया शायद  मेरे  नसीब  में  तेरा  इतना  ही साथ हो                                          यही    दुआ  करता  हूँ     कि तू  जहाँ  भी  रहे , खुश  और   आबाद   हो

Mai badal jaunga

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मै  बदल  जाऊँगा  बदलना  चाहता  हूँ  मैं ढलना  चाहता  हूँ  मैं तेरे  रंग में  ही  तो  रंगना  चाहता  हूँ   मैं पर  मुझे  वक़्त  तो  दो समझता  हूँ   मै    तुम्हारे  प्यार  को तुम्हारे  गुस्से  के भी  अंदाज़  को तुम्हारे  आँसू  भरी  इस  आवाज़  को  सब  समझता  हूँ  मैं मगर  वक़्त  तो दो पौधा   क्षण   में  पेड़     होता  नहीं बच्चा  पल  में  बड़ा  होता  नहीं मैं  भी  बदल  जाऊँगा मगर  वक़्त  तो  दो