hmara pta

हमारा पता
वो   हमसे  हमारा  पता  पूछते  थे 
हम  उनसे  अपनी  खता  पूछते  थे 
हमे  पता  बताने  में  जो देरी  हुई 
उन्होने  खता  बताना  जरुरी  ना  समझा 

हमने  उनसे  कुछ  भी  छुपाया  नहीं  था 
दिल  में  कोई  राज़   दबाया  नहीं  था 
अपना दिल खोलकर  उनको  दिखाया 
उन्हें जब जाना ,तो खुद  सा ही पाया 
मेरे  दिल  ने  भी  एक  सपना सजाया 
शायद  खुदा ने उसे ,मेरे  लिए बनाया 

मगर  ख्वाब  ये   बन गया  झूठा 
कुछ ही रोज़ में ये,काँच  जैसा  टूटा 
उसे  मेरा शहर  लगने लगा छोटा 
उसको  कमाना  था  पैसा भी मोटा 

थोड़ी  मुश्किल  हुई ,मगर  अपने  दिल  को  संभाला 
लगा कुछ इससे अच्छा  है  होने   वाला 

फिर  कभी  किसी मोड़  पर जो मुलाकात होगी 
हँसी  और  ख़ुशी से  अपनी  बात होगी 
ये  दिल  दुआ  करेगा हमेशा 
जहाँ  भी  रहे  वो  खुश रहे  हमेशा 



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